1
उसकी दुनिया में, मैं नहीं रहता था,
फिर भी मै उसमे कहीं रहता था,
उसकी जुल्फों में चांद तारे थे,
मैं भी बादल सा वही रहता था,
ए जो वीरान सी आंखें हैं तेरी,
मैं बहुत पहले ही यहि रहता था,
2
बैठे-बैठे उठता है, और चल पड़ता है,
दिल भी अक्सर सुलग सुलग कर जल पड़ता है,
सीने में कुछ बर्फीली यादें रहती हैं,
धूप लगे तो सारा शहर पीघल पड़ता है,
3
अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूं,
मैं चाहता था चराखों को अपताप करू,
बुको से मुझको इजाजत अगर कभी मिल जाए,
तो शहर भर के खुदाओं को बेनकाब करूंगा,
4
किसी को कांटो से चोट पहुंची,
किसी को फूलों ने मार डाला,
जो इस मुसीबत से बच गए थे,
उन्हें वसूलो ने मार डाला,
5
ए जो दिल में दर्द का आग है, दबी हुई कोई राज है,
मैं वो जख्म हूं जो भरा नहीं, मैं दाग हूं जो मिटा नहीं,
6
लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है,
लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों हैं,
ओ इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
7
हम अब मकान में ताला लगाने वाले हैं,
हम अब मकान में ताला लगाने वाले हैं,
हमे पता चला है मेहमान आने वाले हैं,
8
मंदिरों में दिया नहीं, कहीं मस्जिदों में दुआ नहीं,
मंदिरों में दिया नहीं, कहीं मस्जिदों में दुआ नहीं,
मेरे शहर में है खुदा बहोत, मगर आदमी का पता नहीं,
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