Mai_Balak_hu_gaw_wala_hai_bate_bhi_gaw_wali_|_Poetry_in_hindi_| lovely gudiya library

मैं बालक हूं गांव वाला है बातें भी गांव वाली



 मैं बालक हूं गांव वाला है बातें भी गांव वाली,

आप ठहरे शहर वाले हैं बातें भी शहेर वाली,

सुना बचपन में था मैंने कि बापू शहेर जाते थे,

कमाने पेट भर रोटी हां बापू शहेर जाते थे,

गरीबी है बहुत जालिम ओ डसती सांप जैसे हो,

मकां की छत नहीं पक्की बरसे आग जैसे हो,

मिटाने उस गरीबी को हां बापू शहेर जाते थें,

कमाने पेट भर रोटी हां बापू शहेर जाते थे,

सुना बचपन में था मैंने कि बापू शहेर जाते थें,

वो मेला था बड़ा भारी जो बापू ने दिखाया था,

ये मेला है बड़ा खाली जो बिन बापू के आया था,

करने जिद को पूरी सब, हां बापू शहेर जाते थे

सुना बचपन में था मैंने कि बापू शहेर जाते थे,

कमाने पेट भर रोटी हां बापू शहेर जाते थे,

                                                lovelygudiyalibrary

Post a Comment

0 Comments