आवाम की नजरों में आवारा हूं मैं आपकी
टूटा हुआ सा एक तारा हूं मैं,
बिन सैलाव का किनारा हूं मैं,
उनकी गली में गए थे एक दो दफा तब से,
आवाम की नजरों में आवारा हूं मैं,
हर पल हर घड़ी हर वक्त मेरे संग तू है,
मेरे हंसने का सलीका मेरे बोलने का तरीका,
मेरी जिंदगी जीने का ढंग तू है,
तेरे बिना मेरा नाम भी, अधूरा सा लगता है,
अगर लेखक हूं मैं तो इस लेखक का रंग तू है,
कैसे किसी से झूठा वादा कर देते हैं लोग,
करते-करते बहुत ज्यादा कर देते हैं लोग,
जिनके होने से पूरा हुआ करते थे हम,
करके जुदा खुद से हमें आधा कर देते हैं लोग,
मुझे हौसला चाहिए, कोई दे सकता है,
उसके और मेरे बीच फैसला चाहिए, कोई दे सकता है,
जिसमें उसका गुजारा हो सके ऐसा घर तो नहीं बना पाया आज तलक,
अब एक छोटा सा घोंसला चाहिए, कोई दे सकता है,
निगाहों निगाहों में कैसी बात कर गए हैं,
तुम तो जुल्फें गिरा कर रात कर गए हैं,
तुम्हें छूने की गुस्ताखी हम तो नहीं करना चाहते थे जाना,
ना चाहते हुए भी मेरे हाथ कर गए,
दिन क्यु ढलती है रात क्यु आती है,
मेरी जुबान पर उसकी बात क्यु आती है,
बात प्यार मोहब्बत और शादी तक हो तो सही भी है,
ना जाने मोहब्बत के बीच ए जात क्यु आती है,
जमाने के ताने पसंद आने लगे हैं,
दर्द भरे गाने पसंद आने लगे हैं,
नए रिश्तो को तो आजमा कर देख लिया हमने,
अब कुछ लोग पुराने पसंद आने लगे हैं,
आज चांद की रोशनी भी बड़ी प्यारी सी लग रही है,
वो हमारी ना होकर भी हमारी सी लग रही है,
कितनी बेवफाईयां की है उसने वो अच्छे से जानती है,
सब कुछ जान कर भी कितनी बेचारी सी लग रही है,
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