इस ख़त के जरिए तुम्हे एक फरमान कहते है
इस ख़त के जरिए तुम्हे एक फरमान कहते है
हा हम तुम्हे आज बैमान कहते है |
यु तो कोई जान ले ना सका हमारी |
और जो जान ले कर गया हम ऊसी को जान कहते है |
जिंदगी अपनी खुली किताब कर दी थी |
हमसे खता ये हुई की |
हम तुमसे मोहब्बत तुमसे बे हिसाब कर ली थी |
वक्त पर साबित कर दिया करो की \
बाद में कोई एतबार नहीं करता |
जो दिल से खूब सुरत न हो \
उसे कोई प्यर नहीं करता |
ऐ मोहब्बत का काफला है |
यहाँ हाथ थामे चला करो |
जो हाथ छुट जाये तो कोई इंतजार नहीं करता |
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