काश तुम अजनबी रहते तो अच्छा होता
काश हम तुम कुछ ना कहते तो अच्छा होता |
हम जजबातों में ना बहते तो अच्छा होता |
काश ऐ दिल तुमपे आया ही ना होता |
काश तुम अजबनी रहते तो अच्छा होता |
कास हम एक दुजे को पसंद ही ना आये होते |
वो साथ रहने के सपने ना सजाये होते |
ना मै शेर पढता तुम्हारे खूबसुरती पर |
ना ही मै तेरे नाम का हर्फ़ मैंने दिल में बसाये होते |
तुम में तुम हम में हमी रहते तो अच्छा होता |
काश तुम्हारे दिल में नवी रहते तो अच्छा होता |
जाने क्यों खुद से जायदा जान लिया तुम्हे |
काश तुम अजनबी रहते तो अच्छा होता |
काश वो रेशमी जुल्फे तुम्हारी हवा में ना उर्णी होती |
काश उश दिन हवा ही ना चली होती |
काश ओ तुमने मेरा पहला कोल ना उठाया होता |
काश उष रोज मेरे फ़ोन में नेटवर्क ही ना आया होता |
तुम हमसे दूर ही रहते तो अच्छा होता |
तुम बेकसुर ही रहते तो अच्छा होता |
याद किया है इस कदर की आब भुलाये नहीं भुलाते |
काश तुम अजबनी रहेते तो अच्छा होता |
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