KASH TUM AJABANI RAHATE TO ACCHA HOTA || काश तुम अजनबी रहते तो अच्छा होता || #POETRY #SHAYARI

काश तुम अजनबी रहते तो अच्छा होता 


काश हम तुम कुछ ना कहते तो अच्छा होता |

हम जजबातों में ना बहते तो अच्छा होता |

काश ऐ दिल तुमपे  आया ही ना होता |

काश तुम अजबनी रहते तो अच्छा होता |

कास हम एक दुजे को पसंद ही ना आये होते |

वो साथ रहने के सपने ना सजाये होते |

ना मै शेर पढता तुम्हारे खूबसुरती पर |

ना ही मै तेरे नाम का हर्फ़ मैंने दिल में बसाये होते |

तुम में तुम हम में हमी रहते तो अच्छा होता |

काश तुम्हारे दिल में नवी रहते तो अच्छा होता |

जाने क्यों खुद से जायदा जान लिया तुम्हे |

काश तुम अजनबी रहते तो अच्छा होता |

काश वो रेशमी जुल्फे तुम्हारी हवा में ना उर्णी होती |

काश उश दिन हवा ही ना चली होती |

काश ओ तुमने मेरा पहला कोल ना उठाया होता |

काश उष रोज मेरे फ़ोन में नेटवर्क ही ना आया होता |

तुम हमसे दूर ही रहते तो अच्छा होता |

तुम बेकसुर ही रहते तो अच्छा होता |

याद किया है इस कदर की आब भुलाये नहीं भुलाते |

काश तुम अजबनी रहेते तो अच्छा होता |

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